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Saturday, 12 November 2016

Black Money - तो क्या ख़त्म हो जायेगा काला धन? - Raag Desh by QW Naqvi





करेन्सी का मतलब धन नहीं होता.
करेन्सी धन के लेन-देन का साधन है, धन नहीं.
करेन्सी में किसी भी समय काले धन का बहुत छोटा अंश ही मौजूद होता है.
इसलिए करेन्सी बदलने से काले धन की सफ़ाई असम्भव है. काले धन का बहुत मामूली अंश साफ़ या नष्ट होगा. उसमें भी ज़्यादातर छोटी मछलियाँ ही फँसेंगी.
भारत में पहले दो बार यह कोशिश हो चुकी है. म्याँमार में तीन बार ऐसा किया जा चुका है. श्रीलंका में भी 1970 में ऐसा किया जा चुका है. हर बार विफलता हाथ लगी.


बस एक महीने पहले ही मैंने 'राग देश' में लिखा था कि कुछ लोग पाँच सौ और हज़ार रुपये के नोटों को रद्द कर देने के बचकाने सुझाव दे रहे हैं (काले धन पर गाल बजाते रहिए, 8 अक्तूबर 2016). मुझे क्या पता था कि सरकार ऐसा कर भी देगी.


इस हफ़्ते 'राग देश' में इसी पर विस्तृत टिप्पणी.



Sunday, 9 October 2016

हर राजनीतिक चन्दे के लिए आधार नम्बर अनिवार्य किया जाये!



काला धन ऐसे नहीं रुकेगा. फिर कैसे रुकेगा? क्या बेवक़ूफ़ी भरा सवाल है! रुकेगा तो तब , जब कोई रोकना चाहे! किसे नहीं मालूम कि काला धन कहाँ है? काले धन बिन होय राजनीति! राजनेताओं का धन अचानक कैसे हाहाकारी ढंग से बढ़ जाता है? राजनीतिक दलों को काले धन का कितना बेनामी चन्दा मिलता है? चुनाव में कितना काला धन लगता है? आज तक किसी सरकार ने इस पर कोई लगाम लगाने की कोई पहल की? कैसे करेंगे? अपने पैरों पर कोई कुल्हाड़ी मारता है क्या? आज हर चीज़ के लिए सरकार आधार कार्ड अनिवार्य कर रही है. तो राजनीतिक दलों के लिए भी आधार क्यों ज़रूरी कर दिया जाय कि पाँच रुपये का चन्दा हो या पाँच करोड़ का, हर चन्दे के साथ आधार नम्बर होना ज़रूरी है. काले धन का एक बड़ा स्रोत सूख जायेगा. कोई है तैयार इसके लिए
कैसे ख़त्म हो सकता है काला धन, पढ़िए क़मर वहीद नक़वी का विश्लेषण उनके साप्ताहिक कालम 'राग देश' में. Click to Read.