काला धन ऐसे नहीं रुकेगा. फिर कैसे रुकेगा? क्या बेवक़ूफ़ी भरा सवाल है! रुकेगा तो तब न, जब कोई रोकना चाहे! किसे नहीं मालूम कि काला धन कहाँ है? काले धन बिन होय न राजनीति! राजनेताओं का धन अचानक कैसे हाहाकारी ढंग से बढ़ जाता है? राजनीतिक दलों को काले धन का कितना बेनामी चन्दा मिलता है? चुनाव में कितना काला धन लगता है? आज तक किसी सरकार ने इस पर कोई लगाम लगाने की कोई पहल की? कैसे करेंगे? अपने पैरों पर कोई कुल्हाड़ी मारता है क्या? आज हर चीज़ के लिए सरकार आधार कार्ड अनिवार्य कर रही है. तो राजनीतिक दलों के लिए भी आधार क्यों न ज़रूरी कर दिया जाय कि पाँच रुपये का चन्दा हो या पाँच करोड़ का, हर चन्दे के साथ आधार नम्बर होना ज़रूरी है. काले धन का एक बड़ा स्रोत सूख जायेगा. कोई है तैयार इसके लिए?
कैसे ख़त्म हो सकता है काला धन, पढ़िए क़मर वहीद नक़वी का विश्लेषण उनके साप्ताहिक कालम 'राग देश' में. Click to Read.

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