उरी के बाद देश फिर ग़ुस्से में है. क्या इलाज है पाकिस्तान का? हमारी समस्या यह है कि हमारे यहाँ कभी तो पाकिस्तान के लिए गर्मजोशी से गलबहियाँ होती हैं, तो कभी क्रिकेट डिप्लोमेसी की स्पिन. ख़ूब हवा बनायी जाती है. मुट्ठियाँ भर-भर श्रेय लूटा जाता है, मीडिया राग मल्हार गाने लगता है. और फिर उधर से एक आतंकी वार होता है और यहाँ मुट्ठियाँ तन जाती हैं, चेहरे लाल-पीले होने लगते हैं.
दरअसल, हमारी बुनियादी समस्या यह है कि पाकिस्तान के पास तो उसकी ख़ास 'भारत नीति' है, जिससे वह आज तक कभी नहीं डिगा, सत्ता चाहे जिसके पास रही हो, लेकिन हमारे पास कोई स्पष्ट 'पाकिस्तान नीति' नहीं है. सवाल है कि वह नीति क्या हो?

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