यह बात आज के मुसलिम
युवाओं को जाननी
चाहिए कि देश के साठ से ज़्यादा मुल्ला-मौलवियों ने क्यों सर सैयद अहमद ख़ान के ख़िलाफ़ फ़तवे
जारी किये थे? क्यों उन्हें
'धर्म से बाहर'
घोषित कर दिया गया था? और जब इससे भी बात नहीं बनी तो मौलवी अली बक्श क्यों
मक्का जा कर सर सैयद का 'सिर क़लम कर दिये जाने'
का फ़तवा ले कर आये थे? आखिर क्यों?
क्योंकि मुसलिम उलेमा हमेशा से हर सामाजिक सुधर का विरोध करते रहे हैं.

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