Saturday, 22 October 2016

Making Hindu Rashtra - चुपचाप 'राष्ट्रवाद' की धूप सेंकिए! - raagdesh



देश को कैसे धीरे-धीरे 'हिन्दू राष्ट्र' बनाया जा रहा है? 'राग देश' में क़मर वहीद नक़वी के विश्लेषण के चुनिन्दा अंश.  

विकलांग हैं. खड़े नहीं हो सकते. तो फिर या तो सिनेमा देखने मत जाइए और अगर बहुत ही शौक़ हो, जाना ही हो तो साथ में बड़ा-सा साइनबोर्ड लेकर जाइए. सारी दुनिया को बताइए कि आप विकलांग हैं, इसलिए राष्ट्रगान के समय उठ कर खड़े नहीं हो सकते! वरना कोई पढ़ा-लिखा, सभ्य-सुसंस्कृत, 'राष्ट्रवादी' दम्पति आपको पीट देगा. और भीड़ बड़ी हो गयी तो मार भी डाले, तो हैरानी क्या? यह घटना पणजी में हुई. और कहीं भी हो सकती थी. कहीं भी हो सकती है. देश का ताज़ा समाचार यही है!
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आज जो हो रहा है, उस पर मुझे तो कोई हैरानी नहीं. यह 'मोहिन्दुत्व' है, जिस पर मैंने साढ़े तीन साल पहले लिखा था. लोकसभा चुनावों के भी क़रीब सवा साल पहले. जब तीर्थराज प्रयाग में साधु-सन्तों के जमावड़े के बीच नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लिया गया था. तब 'मोहिन्दुत्व' संघ का नया धाँसू काकटेल था, यानी मोदीत्व के विकास के शीरे में घुला हिन्दुत्व का रसायन! इसकी मार्केटिंग आसान थी. बाज़ार में विकास के बहुत ख़रीदार थे. लक्ष्य साधने के लिए यह हथियार कारगर माना गया था. और समय ने साबित कर दिया कि संघ ने ग़लत नहीं सोचा था.
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लेकिन संघ का एजेंडा 'हिन्दुत्व' नहीं, बल्कि 'हिन्दू राष्ट्र के निर्माण' का है. इसीलिए मोदी सरकार बनते ही एलान हुआ कि आठ सौ साल बाद देश में हिन्दुओं का शासन लौटा है. अशोक सिंहल का बयान याद कीजिए. और फिर देश में 'सर्जिकल स्ट्राइक' शुरू हो गयी. चुन-चुन कर 'दुश्मन' गढ़े गये. निशाने तय किये गये. ईसाई, मुसलमान, दलित, सेकुलर, एनजीओ जो सरकार के अनुकूल हों!
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और मीडिया पर क्या कहा जाये? उसे तो अमित शाह से 'देशभक्ति' का प्रमाणपत्र मिल ही चुका है! है बड़ी उपलब्धि! इसके पहले करगिल युद्ध हुआ, उससे पहले 1971, 1965 और 1962 के बड़े-बड़े युद्ध हुए. देश के मीडिया को किसी ने देशभक्ति का कोई सर्टिफ़िकेट दिया, उसे लेने की ज़रूरत पड़ी. लेकिन एक छोटी-सी सर्जिकल स्ट्राइक मीडिया को 'देशभक्त' बना देती है! अभी तक सरकारी मीडिया होता था, अब मीडिया की नयी नस्ल हमारे सामने है, 'राष्ट्रवादी' मीडिया.




 

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